Capture

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के विचारों से प्रेरित हुए छात्र-छात्राएं, अनुशासन, समर्पण और कठिन परिश्रम के महत्व पर हुई चर्चा

बीसलपुर। शफी डिग्री कॉलेज, बीसलपुर में गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को विश्व विद्यार्थी दिवस के अवसर पर एक प्रेरणादायक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को शिक्षा के महत्व, जीवन में अनुशासन, नवाचार, आत्मविश्वास और लक्ष्य प्राप्ति के प्रति जागरूक करना रहा। इस दौरान विद्यार्थियों ने अपने विचारों के माध्यम से शिक्षा को जीवन में सफलता की आधारशिला बताते हुए देश और समाज के विकास में युवाओं की भूमिका पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम का संचालन बीएड प्रशिक्षु अना फातिमा और अर्शी शम्सी ने किया। दोनों ने प्रभावशाली ढंग से कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए विश्व विद्यार्थी दिवस के महत्व और विद्यार्थियों के जीवन में इसके संदेश को प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी जीवन केवल पुस्तकीय ज्ञान अर्जित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्तित्व निर्माण, विचारों के विकास, आत्मविश्वास बढ़ाने और भविष्य की दिशा निर्धारित करने का महत्वपूर्ण समय भी है। इसी अवधि में विकसित की गई अच्छी आदतें और सकारात्मक सोच व्यक्ति को जीवनभर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं।

संगोष्ठी के दौरान विभिन्न संकायों के विद्यार्थियों ने अपने विचार प्रमुखता से रखे। विद्यार्थियों ने भारत के पूर्व राष्ट्रपति और महान वैज्ञानिक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के प्रेरणादायक विचारों को याद करते हुए उनके जीवन से मिलने वाली सीख पर चर्चा की। उन्होंने डॉ. कलाम के प्रसिद्ध कथन, “सपने वो नहीं जो हम सोते हुए देखते हैं, सपने वो हैं जो हमें सोने नहीं देते” का उल्लेख करते हुए कहा कि जीवन में बड़े लक्ष्य निर्धारित करना और उन्हें पूरा करने के लिए निरंतर प्रयास करना बेहद जरूरी है।

विद्यार्थियों ने कहा कि सफलता प्राप्त करने के लिए केवल सपने देखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन सपनों को साकार करने के लिए मेहनत, लगन, अनुशासन और दृढ़ संकल्प की आवश्यकता होती है। जीवन में अनेक बार कठिन परिस्थितियों और चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन ऐसे समय में घबराने या हार मानने के बजाय धैर्य और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ना चाहिए। विद्यार्थियों ने नवाचार और नई सोच को भी सफलता का महत्वपूर्ण आधार बताया। उनका कहना था कि बदलते समय में ज्ञान के साथ रचनात्मकता और समस्याओं का समाधान खोजने की क्षमता विकसित करना आवश्यक है।

संगोष्ठी में महाविद्यालय के प्रवक्ता प्रदीप कुमार ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए अनुशासन, समर्पण और निरंतर सीखते रहने के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को एक जिम्मेदार, जागरूक और संवेदनशील नागरिक बनाना भी है। विद्यार्थियों को अपने समय का सदुपयोग करना चाहिए और पढ़ाई के साथ-साथ अपने व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास पर भी ध्यान देना चाहिए।

प्रवक्ता प्रदीप कुमार ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि जीवन में सफलता पाने के लिए नियमित अध्ययन, सकारात्मक सोच और निरंतर अभ्यास आवश्यक हैं। किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए धैर्य और निरंतरता बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने भीतर छिपी प्रतिभा को पहचानें, अपनी कमजोरियों को दूर करने का प्रयास करें और ज्ञान प्राप्त करने की प्रक्रिया को हमेशा जारी रखें। उनके अनुसार, अनुशासित जीवनशैली और समर्पित प्रयास विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बनाते हैं।

महाविद्यालय के समन्वयक अनीस बेग ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों को समाज और देश की प्रगति का वास्तविक कर्णधार बताया। उन्होंने कहा कि आज के विद्यार्थी ही कल के शिक्षक, वैज्ञानिक, चिकित्सक, अधिकारी, उद्यमी और जिम्मेदार नागरिक बनकर देश की दिशा तय करेंगे। इसलिए विद्यार्थियों को अपनी शिक्षा के साथ सामाजिक जिम्मेदारियों को भी समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि ज्ञान, नैतिक मूल्यों और सकारात्मक दृष्टिकोण से परिपूर्ण युवा ही एक मजबूत और विकसित राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

अनीस बेग ने विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य के प्रति गंभीर रहने और उपलब्ध अवसरों का सदुपयोग करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यक्ति को सही और गलत के बीच अंतर समझने की क्षमता प्रदान करती है। इसलिए प्रत्येक विद्यार्थी को अपने ज्ञान का उपयोग समाज के हित में करना चाहिए और अपने व्यवहार में ईमानदारी, जिम्मेदारी तथा सहयोग की भावना बनाए रखनी चाहिए।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. राजेन्द्र कुमार ने संगोष्ठी में उत्कृष्ट वक्तव्य प्रस्तुत करने वाले छात्र-छात्राओं की सराहना की। उन्होंने विद्यार्थियों के विचारों और उनकी अभिव्यक्ति की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों के आत्मविश्वास को बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें अपने विचार प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के जीवन, संघर्ष और उपलब्धियों से प्रेरणा लेकर अपने जीवन में बड़े लक्ष्य निर्धारित करने चाहिए।

प्राचार्य डॉ. राजेन्द्र कुमार ने विद्यार्थियों से कड़ी मेहनत, लगन और ईमानदारी के साथ अपने लक्ष्यों की ओर बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि देश को विकसित और सशक्त बनाने में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि विद्यार्थी अपनी शिक्षा, कौशल और प्रतिभा का सही दिशा में उपयोग करें, तो वे न केवल अपना भविष्य उज्ज्वल बना सकते हैं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में भी उल्लेखनीय योगदान दे सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को डॉ. कलाम के सपनों का भारत बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास करने के लिए प्रेरित किया।

संगोष्ठी के दौरान विद्यार्थियों में उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा देखने को मिली। कार्यक्रम ने छात्र-छात्राओं को अपने जीवन के उद्देश्यों पर विचार करने और उन्हें हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध रहने का संदेश दिया। इस अवसर पर महाविद्यालय का समस्त स्टाफ तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

About The Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *