गाय का शिकार करने के बाद गांव के आसपास मंडरा रहा बाघ, ग्रामीणों ने सुरक्षा को लेकर जताई चिंता
लखीमपुर खीरी। थाना शारदानगर क्षेत्र के ग्राम पंचायत टहारा के मजरा सिरसी गांव के पास बाघ की मौजूदगी ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। 13 अगस्त को गांव के आसपास बाघ द्वारा एक गाय को अपना शिकार बनाए जाने के बाद वन विभाग की ओर से बाघ को पकड़ने के लिए पिंजड़ा लगाए जाने की बात सामने आई है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि मौके पर लगाया गया पिंजड़ा खाली है और अब तक बाघ को पकड़ने के लिए कोई प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है। इससे ग्रामीणों में वन विभाग की कार्यशैली को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है।
ग्रामीणों के अनुसार, गांव के नजदीक बाघ की गतिविधियां सामने आने के बाद से लोगों में भय का माहौल है। खासकर खेतों की ओर जाने वाले किसान और ग्रामीण अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। गांव के आसपास लगातार बाघ की मौजूदगी की आशंका के बीच लोगों को अपने दैनिक कामकाज के लिए भी सावधानी बरतनी पड़ रही है।
13 अगस्त को सिरसी गांव के पास बाघ द्वारा गाय का शिकार किए जाने की घटना ने ग्रामीणों की चिंता को और बढ़ा दिया। घटना के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग से बाघ की निगरानी करने और उसे पकड़ने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की। इसके बाद विभाग द्वारा बाघ को पकड़ने के लिए पिंजड़ा लगाए जाने की जानकारी सामने आई।

हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि बाघ को पकड़ने के लिए लगाया गया पिंजड़ा खाली है। ग्रामीणों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि बाघ लगातार क्षेत्र में मौजूद है तो उसे आकर्षित करने और पकड़ने के लिए लगाए गए पिंजड़े की व्यवस्था कितनी प्रभावी है। ग्रामीणों का कहना है कि केवल पिंजड़ा लगा देने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि बाघ की लगातार निगरानी, उसकी गतिविधियों की पहचान और आवश्यकता के अनुसार ठोस कार्रवाई भी जरूरी है।
ग्रामीणों ने वन विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि बाघ की मौजूदगी किसी भी समय गंभीर खतरे का कारण बन सकती है। गांव के आसपास रहने वाले लोगों के लिए यह चिंता का विषय है कि कहीं बाघ किसी इंसान को अपना निशाना न बना ले। ग्रामीणों का कहना है कि अभी तक घटना में पशु का शिकार हुआ है, लेकिन यदि समय रहते बाघ को नियंत्रित नहीं किया गया तो स्थिति गंभीर हो सकती है।
ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग की कार्रवाई केवल औपचारिकता तक सीमित दिखाई दे रही है। उनका कहना है कि पिंजड़ा लगाने के साथ-साथ क्षेत्र में नियमित गश्त बढ़ाई जानी चाहिए और बाघ की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था होनी चाहिए। ग्रामीणों ने यह भी मांग की कि वन विभाग की टीम गांव के आसपास सक्रिय रहकर लोगों को सुरक्षा संबंधी जरूरी जानकारी दे।
बाघ की मौजूदगी से किसानों की परेशानी भी बढ़ गई है। खेतों में काम करने वाले किसानों को अक्सर सुबह और शाम के समय खेतों की ओर जाना पड़ता है। ऐसे में बाघ के डर के कारण ग्रामीण अकेले खेतों की ओर जाने से बच रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि बाघ की मौजूदगी की पुष्टि होती है तो खेतों और गांव के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाना चाहिए।

ग्रामीणों के बीच यह सवाल भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या महज खाली पिंजड़ा लगाने से बाघ पकड़ा जा सकेगा। लोगों का कहना है कि वन विभाग को केवल पिंजड़ा लगाने के बजाय विशेषज्ञों की निगरानी में बाघ को पकड़ने की प्रभावी रणनीति तैयार करनी चाहिए। ग्रामीण चाहते हैं कि विभाग की टीम मौके पर सक्रिय निगरानी रखे और बाघ की गतिविधियों का पता लगाने के लिए जरूरी संसाधनों का इस्तेमाल करे।
ग्रामीणों ने प्रशासन और वन विभाग से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल प्रभावी कदम उठाए जाएं। उनका कहना है कि किसी बड़ी घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय उससे पहले ही आवश्यक सुरक्षा उपाय किए जाने चाहिए। ग्रामीणों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए बाघ को सुरक्षित तरीके से पकड़ने अथवा उसे आबादी वाले क्षेत्र से दूर करने की कार्रवाई की जानी चाहिए।
फिलहाल सिरसी गांव और आसपास के क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी को लेकर ग्रामीणों में दहशत का माहौल बताया जा रहा है। लोग वन विभाग की अगली कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक बाघ को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होती और प्रभावी निगरानी शुरू नहीं होती, तब तक गांव में भय बना रहेगा।
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि वे वन्यजीवों के संरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन आबादी के करीब बाघ की मौजूदगी की स्थिति में इंसानों और पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी विभाग की जिम्मेदारी है। अब देखना यह है कि वन विभाग खाली पिंजड़े के बाद आगे क्या कदम उठाता है और ग्रामीणों को बाघ के खतरे से कितनी जल्दी राहत मिलती है।