**पुराना बस स्टैंड बना नशे का अड्डा
अवैध चखना दुकानों का बोलबाला, आबकारी–पुलिस की मिलीभगत के आरोप
व्यापारियों व स्थानीय नागरिकों में उबाल**
रेशमा लहरे : (ब्यूरो चीफ ) बिलासपुर।
शहर का पुराना बस स्टैंड आज अवैध गतिविधियों का मुख्य केंद्र बन गया है। कभी यात्रियों की भीड़ और व्यापारिक रौनक से चमकने वाला यह इलाका अब नशे का गढ़ बनकर बदनाम हो रहा है। इलाके में अवैध चखना दुकानों का ऐसा बोलबाला है कि स्थानीय लोग अब इसे खुलेआम “नशे का अड्डा” कहने लगे हैं।
🔹 50 मीटर नियम की खुलेआम धज्जियाँ, दुकानदार बेखौफ
आबकारी अधिनियम के अनुसार किसी भी अधिकृत शराब दुकान से 50 मीटर के दायरे में चखना दुकान या शराब सेवन स्थल चलाना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
लेकिन पुराने बस स्टैंड में यह नियम कागजों में ही सिमट गया है। दर्जनों दुकानें शाम होते ही अवैध तरीके से शराबियों के बैठने और चखना परोसने का केंद्र बन जाती हैं।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है—
“आबकारी और पुलिस की मिलीभगत के बिना यह धंधा चल ही नहीं सकता।”
🔹 हुड़दंग और हिंसा का अड्डा—डर में जी रहे लोग
नागरिकों का कहना है कि जैसे ही शाम ढलती है, पूरा क्षेत्र शराबियों, हुड़दंगियों और असामाजिक तत्वों से भर जाता है।
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आए दिन झगड़े, मारपीट, तोड़फोड़
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कई बार चाकूबाजी और गंभीर हिंसा
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राह से गुजरने वाली महिलाओं के लिए असुरक्षित माहौल
फिर भी प्रशासन की तरफ से कोई ठोस कार्रवाई न होने से लोग बेहद नाराज़ हैं।
🔹 रेन बसेरा तोड़ने के बाद बना स्थायी नशा पॉइंट
नगर निगम द्वारा रेन बसेरा की दीवार तोड़े जाने के बाद, खाली पड़ी जमीन पर शराबियों ने स्थायी डेरा जमा लिया है।
दिन में भी असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगातार देखने को मिलता है।
भगत लॉज के नीचे स्थित व्यापारियों का कहना है—
“नशेड़ियों के आतंक से ग्राहक आना बंद हो गए हैं, व्यवसाय चौपट हो रहा है।”
🔹 सिर्फ शराब नहीं — गांजा, नाइट्रा टेबलेट, कफ सिरप की भी खुलेआम सप्लाई
स्थानीय युवाओं और अभिभावकों ने खुलासा किया है कि इलाके में अब छोटे-बड़े नशीले पदार्थों की भी खुलेआम बिक्री हो रही है।
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गांजा
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नाइट्रा टेबलेट
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कफ सिरप
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प्रतिबंधित ड्रग्स
कई बार शिकायतें दर्ज होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होने से लोगों में निराशा फैल गई है।
🔹 विभागीय संरक्षण का आरोप — “24 घंटे में बंद हो सकता है धंधा”
एक व्यापारी के शब्दों में—
“अगर आबकारी और पुलिस चाहें तो यह सब 24 घंटे में खत्म हो सकता है, लेकिन संरक्षण के चलते अवैध दुकानें फल-फूल रही हैं।”
शहर के बुद्धिजीवी और सामाजिक संगठन भी इस बढ़ते खतरे से चिंतित हैं। उनका कहना है कि अगर प्रशासन ने समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए, तो यह इलाका कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन जाएगा।
🔹 पुलिस अधीक्षक ने दिए निर्देश, लेकिन असर गायब
हाल ही में एसपी रजनीश सिंह ने नशे के खिलाफ अभियान तेज करने के निर्देश तो दिए हैं,
लेकिन जमीनी स्तर पर इसका कोई विशेष असर दिखाई नहीं दे रहा है।
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन, पुलिस और आबकारी विभाग से तुरंत संयुक्त कार्रवाई की मांग उठाई है।
🔹 नागरिकों की मांग — “पुराने बस स्टैंड की साख बचाओ”
लोगों का कहना है कि इस इलाके की पुरानी पहचान को बचाए रखने के लिए सबसे पहले
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अवैध चखना दुकानें
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नशे के अड्डे
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असामाजिक तत्वों
को हटाना बेहद जरूरी है।
उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो नागरिक बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

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