March 14, 2026

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मनरेगा में बड़ा खेल? कागजों में 23 मजदूर, मौके पर मिला सिर्फ एक

मनरेगा में बड़ा खेल? कागजों में 23 मजदूर, मौके पर मिला सिर्फ एक

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के ईसानगर ब्लॉक की ग्राम पंचायत मुरावा में मनरेगा कार्यों में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के गंभीर आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों की शिकायत के बाद जब मीडिया टीम मौके पर पहुंची तो वहां का दृश्य सरकारी रिकॉर्ड से बिल्कुल अलग नजर आया। कागजों में जहां दर्जनों मजदूर काम करते दिखाए जा रहे थे, वहीं वास्तविकता में सिर्फ एक बुजुर्ग मजदूर ही काम करता मिला।

ग्रामीणों के अनुसार ग्राम पंचायत मुरावा में “भंडारी के खेत से बिहारी के खेत तक भूमि विकास कार्य” कई दिनों से चल रहा है। यह काम महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत कराया जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब और जरूरतमंद लोगों को रोजगार उपलब्ध कराना है।

लेकिन जब मीडिया टीम मौके पर पहुंची तो वहां की तस्वीर कुछ और ही कहानी बयान कर रही थी। बताया गया कि मनरेगा के मास्टर रोल में 23 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज दिखाई जा रही है, जबकि कार्य स्थल पर केवल एक बुजुर्ग मजदूर ही मिट्टी का काम करता मिला।

ठेके पर कराया जा रहा काम

मौके पर मौजूद बुजुर्ग मजदूर से बातचीत में कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। मजदूर ने बताया कि उसे लगभग 20 फीट लंबा, 5 फीट चौड़ा और करीब 2 फीट ऊंचा पटान बनाने का काम दिया गया है। इसके बदले उसे केवल 250 रुपये देने की बात कही गई है।

सबसे अहम बात यह सामने आई कि यह मजदूर मनरेगा का नियमित श्रमिक नहीं है बल्कि उसे ठेके पर काम दिया गया है। जबकि मनरेगा के नियमों के अनुसार किसी भी प्रकार का ठेका प्रथा इस योजना में पूरी तरह प्रतिबंधित है।

ग्रामीणों के गंभीर आरोप

ग्राम पंचायत के कई ग्रामीणों ने नाम सार्वजनिक न करने की शर्त पर बताया कि मनरेगा कार्यों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हो रही है। उनका आरोप है कि ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव की मिलीभगत से कई बार मजदूरों को केवल फोटो खिंचवाने के लिए बुलाया जाता है।

ग्रामीणों का कहना है कि वास्तविक काम मजदूरों से न कराकर ठेकेदारों के माध्यम से कराया जाता है। इससे सरकारी रिकॉर्ड में मजदूरों की उपस्थिति दर्ज कर दी जाती है, जबकि असली काम कुछ लोगों से कम पैसे में करवा लिया जाता है।

कुछ ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि मनरेगा में पंजीकृत मजदूरों को पूरा भुगतान नहीं दिया जाता। मजदूरों को केवल उस दिन की मजदूरी दी जाती है जिस दिन वे बैंक से पैसे निकालते हैं।

पोर्टल पर दिखा अलग आंकड़ा

जब मीडिया टीम ने मनरेगा के आधिकारिक पोर्टल की जांच की तो वहां 27 फरवरी से मजदूरों की उपस्थिति दर्ज दिखाई दी। पोर्टल पर कई मजदूरों के नाम और उनकी हाजिरी का रिकॉर्ड उपलब्ध था।

लेकिन जमीन पर चल रहे काम की स्थिति उस रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रही थी। यदि पोर्टल के आंकड़ों और मौके की स्थिति की निष्पक्ष जांच की जाए तो सच्चाई सामने आ सकती है।

प्रधान और सचिव ने नहीं दिया जवाब

इस पूरे मामले में मीडिया टीम ने ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत सचिव से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन दोनों ने इस विषय पर कोई प्रतिक्रिया देना जरूरी नहीं समझा।

उनका पक्ष न मिल पाने से कई सवाल और गहरे हो गए हैं। यदि सब कुछ नियमों के अनुसार हो रहा है तो फिर जवाब देने से परहेज क्यों किया गया?

बीडीओ ने दिए जांच के निर्देश

मामले की गंभीरता को देखते हुए मीडिया टीम ने ईसानगर ब्लॉक के खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) धन प्राप्त यादव से संपर्क किया। उन्हें पूरे मामले की जानकारी दी गई।

बीडीओ ने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी और यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन की भूमिका पर निगाहें

लखीमपुर खीरी जिले में विकास कार्यों की निगरानी के लिए जिला प्रशासन सक्रिय बताया जाता है। जिले के मुख्य विकास अधिकारी अभिषेक कुमार की छवि एक सख्त और ईमानदार अधिकारी के रूप में मानी जाती है।

ऐसे में अब सबकी निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि यदि इस मामले की निष्पक्ष जांच होती है तो सच सामने आएगा।

सरकार की योजनाओं पर उठे सवाल

मनरेगा योजना को ग्रामीण गरीबों के लिए रोजगार का बड़ा साधन माना जाता है। सरकार हर साल इस योजना के लिए करोड़ों रुपये का बजट जारी करती है।

लेकिन यदि स्थानीय स्तर पर ही योजनाओं में अनियमितताएं होने लगें तो इसका सीधा असर गरीब मजदूरों के अधिकारों पर पड़ता है।

फिलहाल मुरावा ग्राम पंचायत में सामने आए इस मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होती है या नहीं।

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