धान खरीदी, किसानों को 3100 रुपये प्रति क्विंटल देने के वादे, बेरोजगारी, पलायन और बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं पर सरकार से मांगा जवाब
रिपोर्ट: बाल्मीकि यादव, जिला ब्यूरो, आज तक लाइव 24, उमरिया।
उमरिया, मध्य प्रदेश। मुख्यमंत्री के उमरिया आगमन के दौरान जिला युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को उनसे मुलाकात का अवसर नहीं मिलने का मामला अब राजनीतिक रूप लेता दिखाई दे रहा है। युवा कांग्रेस का आरोप है कि जिले की समस्याओं से मुख्यमंत्री को अवगत कराने के लिए 13 अक्टूबर को जिला प्रशासन को लिखित आवेदन देकर मुलाकात की अनुमति मांगी गई थी, लेकिन इसके बावजूद कार्यकर्ताओं को मुख्यमंत्री से मिलने नहीं दिया गया। संगठन के अनुसार, 14 अक्टूबर की सुबह करीब छह बजे पुलिस ने कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। इस घटनाक्रम को लेकर युवा कांग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर जिले के विभिन्न जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की घोषणा की है।
युवा कांग्रेस का कहना है कि उमरिया जिले में किसानों, मजदूरों, बेरोजगार युवाओं और आम नागरिकों से जुड़ी कई समस्याएं हैं, जिन पर सरकार का ध्यान आकर्षित करना जरूरी है। संगठन के कार्यकर्ता मुख्यमंत्री से मिलकर इन समस्याओं को सीधे उनके सामने रखना चाहते थे, ताकि जिले के लोगों को राहत मिल सके। लेकिन मुलाकात नहीं हो पाने के कारण अब संगठन प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अपनी बात सार्वजनिक रूप से रखने की तैयारी कर रहा है।
मुलाकात नहीं मिलने पर उठे सवाल
युवा कांग्रेस के मुताबिक, मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर कार्यकर्ताओं ने पहले ही प्रशासन से संपर्क कर मुलाकात की अनुमति मांगी थी। संगठन का दावा है कि आवेदन देने के बावजूद उन्हें मुख्यमंत्री के सामने अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिला। इसके बाद पुलिस द्वारा कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने का मामला भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में उठाया जाएगा।
इस घटनाक्रम ने जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के सामने आम लोगों की समस्याएं रखने के अवसर को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, इस संबंध में जिला प्रशासन और पुलिस का पक्ष सामने आना बाकी है। प्रशासन का पक्ष मिलने के बाद मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।
धान खरीदी और किसानों के वादों पर सरकार से सवाल
प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसानों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की बात कही गई है। युवा कांग्रेस धान खरीदी व्यवस्था, उपार्जन केंद्रों पर पंजीयन में आ रही समस्याओं और किसानों को 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान का भुगतान करने के वादे पर सरकार से जवाब मांगने की तैयारी में है।
संगठन का कहना है कि किसान अपनी उपज बेचने और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए परेशान न हों, इसके लिए व्यवस्था को सुचारु बनाया जाना चाहिए। धान खरीदी की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर उसका समय रहते समाधान किया जाना जरूरी है। किसानों को किए गए वादों और वास्तविक स्थिति के बीच अंतर होने पर सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
बेरोजगारी और पलायन का मुद्दा भी उठेगा
युवा कांग्रेस जिले में बेरोजगारी और रोजगार के सीमित अवसरों को लेकर भी सवाल उठाएगी। संगठन के अनुसार, रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिलने से युवाओं के सामने आर्थिक चुनौतियां खड़ी होती हैं। ऐसे में स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने और युवाओं को अपने ही क्षेत्र में काम के अवसर देने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।
इसके साथ ही मजदूरों के पलायन का मुद्दा भी उठाया जाएगा। संगठन का कहना है कि जिले के लोगों को रोजगार की तलाश में दूसरे क्षेत्रों में जाने के लिए मजबूर होने जैसी परिस्थितियों पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। शिक्षा, सड़क और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े विषयों को भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल किया जाएगा।
स्वास्थ्य सुविधाओं और वन विभाग पर भी उठेंगे सवाल
युवा कांग्रेस जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी सरकार और प्रशासन का ध्यान आकर्षित करना चाहती है। संगठन के मुताबिक, आम नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए। अस्पतालों में उपचार, जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं और मरीजों को समय पर सहायता मिलने जैसे विषयों पर सवाल उठाए जाएंगे।
इसके अलावा वन विभाग में कथित भ्रष्टाचार को लेकर भी संगठन सवाल उठाने की तैयारी में है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। युवा कांग्रेस का कहना है कि संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि आम लोगों का सरकारी व्यवस्था पर भरोसा बना रहे।
जनता की समस्याओं पर जवाबदेही की मांग
युवा कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि किसानों, मजदूरों, बेरोजगार युवाओं और आम नागरिकों की समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। संगठन प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए इन मुद्दों को सार्वजनिक मंच पर उठाकर सरकार और प्रशासन का ध्यान आकर्षित करना चाहता है।
अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री से मुलाकात नहीं हो पाने और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने के मामले पर प्रशासन क्या स्पष्टीकरण देता है। साथ ही, धान खरीदी, रोजगार, पलायन और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े सवालों पर संबंधित विभागों की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं।
उमरिया में अब सवाल सिर्फ मुख्यमंत्री से मुलाकात का नहीं, बल्कि जिले के किसानों, युवाओं, मजदूरों और आम नागरिकों की समस्याओं के समाधान का भी है।