अपर पुलिस अधीक्षक (पूर्वी) खीरी की अध्यक्षता में रिजर्व पुलिस लाईन खीरी सभागार कक्ष में SJPU व थाना A.H.T.U की मासिक समीक्षा, समन्वय बैठक व प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन; महोदय द्वारा महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन, उत्तर प्रदेश लखनऊ द्वारा जारी SOP का अक्षरश: पालन करने हेतु दिए दिशा-निर्देश।
पुलिस अधीक्षक महोदय खीरी, श्री गणेश प्रसाद साहा के निर्देशन व अपर पुलिस अधीक्षक महोदय खीरी (पूर्वी) की अध्यक्षता में पुलिस लाईन खीरी सभागार कक्ष में विशेष किशोर पुलिस इकाई (SJPU) व थाना A.H.T.U (मानव तस्करी रोधी/एंटी ह्यूमन ट्रैफिंकिंग) की मासिक समीक्षा, समन्वय बैठक व प्रशिक्षण कार्यशाला आहूत की गई।
प्रशिक्षण कार्यशाला में जनपद खीरी के सी.डब्ल्यू.सी. के अध्यक्ष, श्री एसपी सिंह; अभियोजन विभाग से A.P.O श्री विजय कुमार; CWC से आर.एस सिंह; बाल श्रम आफिस श्रम प्रवर्तन अधिकारी प्रियंका वर्मा; चाइल्डलाइन से अंजुमन परवीन; एम ट्रस्ट से नाज फातमा; मानव सेवा संस्थान केन्द्र प्रभारी श्री अवधेश कुमार; बचपन बचाओ आन्दोलन से ए.पी.ओ श्री राजबहादुर, श्री इन्द्रजीत वर्मा, वन स्टॉप सेन्टर से म0आ0 सुधा गंगवार सहित सभी थानों से सम्बन्धित बाल कल्याण अधिकारी/कर्मचारीगण व अन्य विभागों के अधिकारीगण शामिल हुए। कार्याशाला में पूर्व में जारी किए गए कार्यवृत के अनुपालन के संबंध में चर्चा की गई।
साथ ही उपस्थित अन्य अधिकारीगण द्वारा महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन उत्तर प्रदेश लखनऊ द्वारा जारी अवैध एजेंटो के खिलाफ एवं मानव दूर्व्यापार के प्रकरणों में विधिक कार्रवाई किए जाने हेतु दिशा निर्देश/मानक संचालन प्रक्रिया SOP तथा माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा just rights for children alliance & others VS Harish and others (Criminal appeal No. 2161- 2162 of 2024) के अंतर्गत पारित निर्णय दिनांक 23 सितंबर 2024 के अनुसार न्यायिक प्रक्रिया में ‘Child Poronography’ के स्थान पर [Child Sexual Exploitation and Abuse Material (CSEAM) ‘बाल यौन शोषण एवं दुर्व्यापार सामग्री’ शब्द का उपयोग किया जाएगा, जिससे बच्चों की गरिमा व उनके सम्मान की रक्षा सुनिश्चित की जा सके। अनुसंधान एवं थानों पर नियुक्त बाल कल्याण पुलिस अधिकारी के समक्ष आ रही समस्या एवं सुझावों, पीड़ितों के अश्वासन, बाल गुमशुदा, बालश्रम, नशा मुक्त अभियान, बाल विवाह, बाल भिक्षावृत्ति की रोकथाम, लैंगिक समानता, नारी शक्ति किशोर न्याय अधिनियम 2015 मे हुए नवीनतम संशोधन पॉक्सो एक्ट के अभियोग पंजीकृत होने के 24 घंटे के अंदर सीडब्ल्यूसी को सूचित करना, पॉक्सो के मामले में फार्म ए व बी को पुलिस द्वारा भरकर संबंधित को समय से भेजा जाना, बाल कल्याण अधिकारी के कर्तव्य का पालन, जे.जे एक्ट के अंतर्गत सामाजिक पृष्ठभूमि, किशोर न्याय बोर्ड में पुलिस अधिकारियों रिमांड लेने हेतु सादे वस्त्रों में आना, जे.जे एक्ट की धारा 24 आदि तथा पॉक्सो एक्ट से संबंधित अभियुक्तों की माननीय उच्च न्यायालय से प्राप्त बेल नोटिस को बाल कल्याण समिति एवं वादी/पीड़िता को अंदर समय उपलब्ध कराने के संबंध में विस्तृत रूप से चर्चा की गई एवं जागरूकता अभियान चलाने हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
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