April 5, 2025

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पत्रकारों की ब्लैकमेलिंग से सरकारी अधिकारी परेशान, प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग

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छत्तीसगढ़ में कथित पत्रकारों की ब्लैकमेलिंग से सरकारी अधिकारी परेशान, प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग

छत्तीसगढ़ के कोरिया और एमसीबी जिलों में इन दिनों शासकीय और अर्ध-शासकीय विभागों के अधिकारियों को कथित पत्रकारों द्वारा ब्लैकमेल करने और अवैध वसूली करने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। आर. स्टीफन, स्टेट हेड छत्तीसगढ़ ने इस मामले को गंभीरता से उठाते हुए बताया कि कुछ कथित पत्रकार, जो न तो किसी मान्यता प्राप्त मीडिया हाउस से जुड़े हैं और न ही जिनका क्षेत्र में कोई वजूद है, पत्रकारिता की आड़ में अधिकारियों को डराने-धमकाने का धंधा कर रहे हैं।

ये लोग छोटे अखबारों के नाम पर आईडी कार्ड और पीडीएफ प्रारूप में समाचार पत्र दिखाकर अधिकारियों को शासन की कमियों का हवाला देते हुए डराते हैं और फिर पैसे की मांग करते हैं। अधिकारियों ने शिकायत की है कि हर माह ये कथित पत्रकार सरकारी दफ्तरों में पहुंचते हैं और गड़बड़ियां उजागर करने की धमकी देकर अवैध वसूली करते हैं। इससे अधिकारी न केवल मानसिक तनाव में हैं, बल्कि प्रशासनिक कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।

इस तरह के मामलों से पत्रकारिता की साख पर भी बट्टा लग रहा है। वास्तविक और ईमानदार पत्रकार भी इन कथित पत्रकारों की हरकतों के कारण शक के घेरे में आ रहे हैं, जिससे उनकी गरिमा और सम्मान को ठेस पहुंच रही है। शासकीय कर्मचारी संगठनों ने भी इस मामले में शासन का ध्यान आकर्षित करते हुए मांग की है कि प्रशासन ऐसे फर्जी पत्रकारों पर शिकंजा कसे, जो चौथे स्तंभ के नाम पर कालिख पोतने का काम कर रहे हैं।

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि डबल इंजन सरकार की कोशिशों के बावजूद इन कथित पत्रकारों के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई न होने से वे खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। प्रशासन से अपील की जा रही है कि ऐसे मामलों पर तत्काल संज्ञान लिया जाए और फर्जी पत्रकारों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं। साथ ही, फर्जी पत्रकारों के आईडी कार्ड और समाचार पत्रों की भी समय-समय पर जांच की व्यवस्था हो, ताकि पत्रकारिता की गरिमा और भरोसे को कायम रखा जा सके।

अधिकारियों और शासकीय कर्मचारी संगठनों ने सरकार से यह भी आग्रह किया है कि एक विशेष अभियान चलाकर इन कथित पत्रकारों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। इससे ईमानदार पत्रकारों का सम्मान भी बरकरार रहेगा और सरकारी विभागों में भयमुक्त वातावरण बन सकेगा। अब देखना यह होगा कि शासन इस गंभीर समस्या पर कितना जल्द संज्ञान लेता है और किस स्तर की कार्रवाई करता है।