ग्राम निधि/मनरेगा में घोटाला जांच पर उठे सवाल, शिकायतकर्ताओं को मिली धमकी
लखीमपुर खीरी। जिलाधिकारी खीरी के निर्देश पर विकास खंड बांकेगंज के ग्राम खंजनपुर में ग्राम निधि व मनरेगा में हुए कथित घोटाले की जांच जारी है, लेकिन जांच-पड़ताल को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। शिकायत करने वाली गरीब, मजदूर महिलाएं आरोप लगा रही हैं कि आरोपियों को ही जांच की जिम्मेदारी दे दी गई है, जिससे उन्हें न्याय की जगह धमकियां मिल रही हैं।
क्या है मामला
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ग्राम खंजनपुर में शिक्षक, ग्राम पंचायत सदस्य व ग्राम प्रधान के परिजनों को मनरेगा के तहत कार्यों में शामिल कर अनियमित रूप से भुगतान करने का आरोप है।
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ग्राम निधि से जुड़े कार्यों में भी बंदरबांट की शिकायत की गई है।
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गरीब व मजदूर परिवारों का आरोप है कि उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना से वंचित रखा गया है।
शिकायत के बाद जिलाधिकारी खीरी ने जांच का आश्वासन दिया था।
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19 मार्च को संयुक्त खंड विकास अधिकारी जितेंद्र कुमार यादव व अन्य अधिकारियों ने ग्राम पंचायत खंजनपुर का दौरा किया।
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21 मार्च को खंड विकास अधिकारी (बांकेगंज) ऋषि कांत ने भी जांच-पड़ताल की औपचारिकता पूरी की।
शिकायतकर्ताओं को धमकी के आरोप
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जब वे अपनी समस्याएं बता रही थीं, तो उन्हें आरोपियों ने धमकाया और यहां तक कहा कि “जहां से चाहो, वहां से जांच करा लो।” महिलाओं का आरोप है कि उन्हें समाधान देने की बजाय डराया-धमकाया जा रहा है।
शिकायत फिर पहुंची मुख्यमंत्री तक
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पीड़ित महिलाएं कहती हैं कि वे 1 अप्रैल को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लखनऊ में मिलकर पूरे प्रकरण की शिकायत करेंगी।
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महिलाओं ने मुख्यमंत्री कार्यालय को रजिस्टर्ड डाक से पत्र भेजकर जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
डीएम को दी गई जांच रिपोर्ट
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संयुक्त खंड विकास अधिकारी जितेंद्र कुमार और पंचायत अधिकारी ने पहली जांच की रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजी।
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बाद में खंड विकास अधिकारी ऋषि कांत ने भी दूसरी जांच की रिपोर्ट तैयार की है।
शिकायतकर्ता महिलाओं का आरोप है कि दोनों ही जांच में ग्राम प्रधान और पंचायत अधिकारी की संलिप्तता को ढंग से उजागर नहीं किया गया। उनका कहना है कि “जांच के नाम पर खानापूर्ति हो रही है और असली दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही।”
क्या कहते हैं नियम
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने की बात कही है। इसके बावजूद, शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जमीनी स्तर पर कार्रवाई न के बराबर हो रही है और आरोपी अधिकारी बेखौफ नजर आ रहे हैं।
निष्कर्ष: ग्राम खंजनपुर में मनरेगा और ग्राम निधि घोटाले की शिकायतों ने प्रशासनिक अमले पर भ्रष्टाचार के गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि जिलाधिकारी खीरी और मुख्यमंत्री इस प्रकरण में क्या कदम उठाते हैं, ताकि गरीब-मजदूर महिलाओं को इंसाफ मिल सके।
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